
Monday, 7 December 2009
आज थारी पांतौ रो म्हैं पड़ग्यौ चूल्हा मंे

Sunday, 6 December 2009
संत री साख री मिल गी सेठ रै छोरा छोरी ने मुगती

एक नगर में रातीराम नाम रो सेठ रैवतौ हौ। उणरै घरै छौरौ जलमियौ तौ ‘बै-माता‘ अंछर डालण सारू आई। सेठ बे-माता सू पंूछियौ आप कुण हौ। ‘बै-माता‘ कह्यौ, मै ‘बै-माता‘ हूं और थ्हारा बेटे मांय अंछर रै बारै में पूछियौं तौ ‘बै-माता‘कह्यौं थ्यारै मरण रै पछै थारौ छोरो सिकारी बनेळा, जिनावर मारनै पेट भरेला। ‘बै-माता‘ री बात सुण सेठ कह्यों म्हारै अठै तो जिनावर भी भूखा नीं सोवै, अेड़ो कदी नीं व्है। थ्हारा अंछर झूठा हैं। दूजी बार सैठ रै घर छौरी जलमी। ‘बै-माता‘ पाछी आई। सेठ पूछियों तो ‘बै-माता‘ कह्यौ, आ खोटा काम करैला। सेठ नै आ बात भी नीं जची। थोड़ा टैम पछै सेठजी सुरग सिधार गिया। उणरौ सगळौ धन खत्म व्हैगियौ। सेठ रौ छौरौ शिकारी बण गियौ। वौ जिनावर मारतौ अर आपरै पेट पाळतौ। छोरी खोटा काम में पड़गी। एकर एक संत जो, उण सेठ रा सथी हा, वे वठै आया। मिनखा सूं सेठ रौ पूछियौ तौ उणनै सगळी बात ठा पड़गी। संत वठै हीं जम ग्या। सिंझया पोर जद सेठ रौ छौरौ जंगल सूं पाछै आयौ तौ उणनै आपरी ओलखाण बताई। दूजे दिन संत भी उणरै सागै जंगल गिया। संत कह्यौ थ्हारै हाथ सूं एक जिनावर मरैला, अेड़ो थ्हारा भाग में है। इण सारू थूं छोटा मोटा जिनावर मत मार। वठै चिड़ी-कमेड़ी सूं लेयर घणा जिनावर उणरै आगै आया पण संत हर बार उणरौ हाथ पकड़ लियो। उणनै कोजी भूख लागी हीं, पण वौ मजबूर हौ। सिंझया व्हैती-व्हैती वठै एक हाथी आयौ जणै वो तीर मारियौ तौ हाथी चित व्हैगियौ। उणरा माथ्ज्ञा सूं घणा गजमुक्ता निकलिया, इणणै बैचणै सेठ रौ बेटौ पाछौ मालदार बण गियौ। अगली बार संत सेठ री छोरी रैकने पूगिया। उणनै कह्यौ, थ्हारै घरै जौ भी आवै थूं किंवाड़ मत खोलजै। वा यूं ही करियौ। पैला कम रिपिया रा देवाल आया पछै हजारों रिपिया देवण वाला आया पर वा किवाड़ नी खोलिया। बे-माता रा अंछर खोटा नीं व्है इण सारू खुद भगवान मिनख रा वेष में आया, पण वो किवाड़ नीं खोलिया। वा कह्यौ अगर थ्हैं भगवान हो तो किवाड़ बंद होवण पर भी अंदर आ सकौ। जद भगवान् मायनै आयनै उणनै दरसन दिया अर उणरी मुक्ति व्हिई।
Tuesday, 24 November 2009
नवां ठाकर कांव खेल करे

सुणतर में हमें पासी गडबड वैवा लागी है, पैला तो ठाकर जीतता ही गोम गोम नवां-नवां ठाकर जै माताजी री लेवा सारू तियार वेता परा। पर हमै नवां ठाकर पेदा वुआ है, अतरू नी हमे तो गोम माती सोरी घणी वेवा लागी। वात १९ नवंबर री है, सुणतर रू जालेरा गांम मा एक राशन री दूकान है। पेला अठै पाल वाळा जगाजी रसपूत रे छोकरा रै नोमे कोठो हतो, पण राज वदलता रबारियो री सिकायत ती वो कोठो वदल ने सातरू वाला रीदा रबारी ने राज ऐ देरायो। वण कोठा माय १९ तारीख रै आधी रात मे १२० बोरी घऊ, पोस बोरी खोड अर सार ड्रम घासलेट कोई सोर ले गिया। हसण वाली वात आ है कि पाए घरो में मनख जागता हुता। वै कै के रातरा एक जीप डाले सार वार फेरा कर आ माल काठयो है, वणोरो कणो आ कै रातरा रीदा रा आदमी वैला अण वास्ते धियान नी दिधों। कियूकी रात मा ऐडो घणी वार वै। सवारडे थोणा में रीदे रबारी रपोट कराई। पण पोस दन हुआ पोलिस कोय नी किदू। पोलिस ने वैम रीदा माथे ही है, अणै ही स कोई गडबड किधु है। राज अणोरो है।
सुणतर रै गोमडों में अण वात रो वायरौ हाळे है। जठै जावा वठै आ ही वात, कोई कै की आ सोरी पाल वाळे कराई कियूकि पैला वणरै कोठो हो। जैडो मुंडो वेडी वात। एक रात मांय सोर एक हागे जीपडी ती सार फेरा किकण करै। सोर एक वार सोरी करे न पासा नी आवता। पण ऐ सोर तो सार वार एक ही ठकोणे पासा आवे न फेरा किधा परा। कतरी हिमत अणेम राज है। पण राज री भूंडाई सब करै। कैवे कि ऊकालियू परू है हमे कावं करणु। अफसर पण केवे कि ऐडू पैला नी देखयू। पोलिस पण कोय नी करती कियूकि वणनेे भी वैम है। खेर देखो अण वात रो कावं खुलासो वे??
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